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अक्तूबर 02, 2013

हमारा इसमें क्या कुसूर था

अपना उसूल-

काटों पर ही चलना,
अपना जुनून था,

नफरत को प्यार से,
जीत कर आया सुकून था |

क्रोध के अग्नि पर,
प्रेम की बौछार करना,
अपना तो ध्येय था,

निरर्थक नहीं यह व्यय था |
सत्य का आह्वान,
असत्य का विनाश करना,
अपना तो यही उसूल था,



इसके लिए बद होना भी कबूल था
प्यार का सागर नहीं, बन पाये तो क्या,
नदी बनना भी हमें, मंज़ूर था |

आसमा से गिरा दिया, यूँ ज़मीन पर
तू ही बता दे, ओ मेरे 'माही ,
हमारा इसमें,  क्या कुसूर था |
..........सविता मिश्रा
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2 टिप्‍पणियां:

राकेश कौशिक ने कहा…

"अपना तो यही उसूल था,
इसके लिए बद होना भी कबूल था"

Pradeep Pandey ने कहा…

kuchh achchha karna hame bhi kaabool tha.