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दिसंबर 07, 2017

कोई बात हो तभी लिखे

कोई बात हो तभी लिखे यह जरुरी तो नहीं
चोट खाए दिल तभी लिखे यह जरुरी तो नहीं
मन का गुबार निकल जाये यह बात जरुरी है
दिल में रखकर दिल जलाये यह जरुरी तो नहीं |..सविता
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कोई ख़ास नामचीन तो पहले भी ना थे पर अब तो हम गुमनाम होना चाहते हैं ! ........सविता मिश्रा
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जैसे ही साँसों  की डोर टूटेगी, अपनी किमत बढ़ जायेगी ! saविता miश्रा
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बेवकूफ पति अपनी पत्नी को घर की मुर्गी साग बराबर समझते हैं और दुखी रहते हैं  और उसे भी दुःख देते हैं  ...!
और समझदार पति अपनी पत्नी को हूर की परी समझते हैं, खुद भी खुश रहते हैं और उसे भी खुशियाँ ढेर सारी देते हैं |

सविता मिश्रा

7 टिप्‍पणियां:

Dhruv Singh ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार ११ दिसंबर २०१७ को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी ने कहा…

आखिरी वाली में आपने जिन्दगी का सार कह दिया
सुन्दर

Nitu Thakur ने कहा…

वाह !!बहुत खूब।

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत खूब।

सविता मिश्रा 'अक्षजा' ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आपका

सविता मिश्रा 'अक्षजा' ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आपका

सविता मिश्रा 'अक्षजा' ने कहा…

शुक्रिया आपका