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अगस्त 31, 2018

‘हिन्दी हाइकु’ वेबसाइट में छपे हमारे हायकु

1

माक़ूल नहीं, 

पिशाच हर कहीं 

सँभल नारी ।

2

दोष खुद का

छिद्रान्वेषी मानव

भीड़ बने हैं।

-0-
https://hindihaiku.wordpress.com/2014/03/23/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%9F%E0%A5%87/


टहनी नग्न

पतझर की ऋतु

शाखें वीरान।

2

शाख से टूटे

चुर-मुर का शोर

जर्द पत्तियाँ ।

3

ठूँठ मुस्काया

देख पेड़ की दशा

डाह प्रगाढ़।

4

जीवन- चक्र

पतझर के बाद

सृजन हुआ।

5

नीड़ सघन

मधुमास के पहले

गेह वीरान।

6

असंगत है

पतझर-वसंत

फिर भी साथ।

7

वृक्ष सलोना

हर नोक थी सूनी

कोंपल फूटी।

8

शिशिर बीता

नन्ही-नन्ही कोपल

मुस्करा उठी।

9

जर्द हो पत्ते

पतझर की घड़ी

गाछ लज्जित।

-0-
https://hindihaiku.wordpress.com/2014/04/11/%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%81%E0%A4%B5%E0%A4%B0/


1

वृक्ष कटान

हताहत धरती

क्रूर इंसान।

2

सलिल लुप्त

सुबकती धरती

वीरुध -शून्य।

3

धरती पुत्र

नीलाम की अस्मिता

धन बटोर।

4

हृदय–घाव

दिखलाती धरती

खुलीं दरारें।

5

आहत आज

ये वसुमती धरा

दुखित हुई।

6

जेवर वृक्ष

धरती हरी-भरी

गर्व करती।

7

भू-गर्भ-जल

कराहती धरती

अति दोहन।

8

नेह अपार

धरती गदराई

सुधा बरसे।

-0-

( वीरुध= पेड़-पौधे , वनस्पति)
https://hindihaiku.wordpress.com/2014/06/27/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AC%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80/

1

हृदय -शूल

बनते जीवन के

कुटिल शब्द ।
https://hindihaiku.wordpress.com/2014/07/04/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%95%E0%A5%81-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%9A%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D/


3-सविता मिश्रा

1

मेघ विप्लव

झमाझम बरस

भू त्राहि- त्राहि।

2

चूनर हरी

बूढ़ी  धरा युवा-सी

ओढ़ के चली।

3

सावन आया

मही जवान हुई

मेघ मिलाप।

4

धरा रसीली

सावन लगते ही

उन्मुक्त सृष्टि ।

-0-
https://hindihaiku.wordpress.com/2014/07/18/7532/


-सविता मिश्रा

1

बहन बिना

अँखियाँ अश्रु- भरी

राखी त्योहार   

2

गर्व से फूली

बाँध सैनिक हाथ

बहना प्यार 

3

प्रेम बंधन

बाँधी भाई कलाई

अमोल राखी

4    

बहन प्यार

कच्चा नहीं, फौलादी

रक्षाबंधन

-0-
https://hindihaiku.wordpress.com/2014/08/10/7616/

जुलाई 27, 2018

दोमुँहे-

"मन की"

दोमुँहों से रहना सदा बच के
चलो जरा संभल-संभल के

निंदक तक तो सब ठीक हैं
दुरी उनसे ,जो करते पीक हैं

दोमुँहें  होते हैं घातक बेहद
बचना उनसे मुश्किल है शायद

सामने मुँह पर लल्लो-चप्पो करते हैं
पीठ पीछे वही जहर उगलते फिरते हैं

सांप- छुछुंदर तो हैं आपस में दुश्मन
दोमुँहें तो आपके अपने बन छलते हैं

अतः चलना जरा उनसे संभल-संभल के
वर्ना हाथ मलते रहोगें खड़े हक्के-बक्के । 
सविता मिश्रा
 यूँ ही फालतू बकवास
हो कुछ हास-परिहास😊
:)

पुरानी कविता कमेंट में पड़ी हुई आज किसी के लाइक करने पर मिला💁
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1150622668309320&id=100000847946357

गुरु नमन

हर तरफ तो हैं गुरु बिखरें
किसको-किसको नमन करें
सीख देने वाले  मिलें जहां बहुत
ओ फेसबुक हम नमन तुझे  करें! #सवितामिश्रा

जुलाई 24, 2018

लुटेरे-


समाज में और फेसबुक पर भी कई लुटेरे बैठें हैं।
पैसा हो या आपकी रचना, फटाफट से लूट लेतें हैं।
सब्ज़बाग सपनों का दिखा, करके मीठी-मीठी बात
आपकी मेहनत का फल लेकें धीरे से फूट लेतें हैं। #अक्षजा
24/7/2018

अप्रैल 16, 2018

रहना सीखो-

कल किसने देखा है
क्या होगा !
आज में जीना सीखो 
दूजे के प्रति रुखे
अपने व्यवहार को
तुम बदलना सीखो
सोते सोते दिन बिता रहे हो
तो जरा जागना सीखो
पाप कर्म को पुन्य में
तुम तनिक बदलना सीखो
मान लो सविता की बात
हर एक क्षण तुम जीना सीखो
कल रहे, न रहें हम
आज ही सब से प्रेम से
मिल-जुलकर रहना सीखो |सविता मिश्रा 'अक्षजा'

मार्च 26, 2018

हद कर दी

1. वाह भगवान् अब हद कर दी
बनाये शैतान या रब हद कर दी।
2..मरीज हुए हैरान परेशान....आगे क्लिक करने पर 



http://kavitabhawana.blogspot.in/2014/03/blog-post_8.html

फ़रवरी 22, 2018

कुछ मन की

नया मौसम भी कम ख़ुशगवार नहीं
खिलखिलाइयें कि आप वर्तमान में हैं😜

बस दिमाग है कभी कभी नहीं चलता। 
#sm

--००--

हम तेरे हुए तो क्या! तू मेरा हो जाये तो बात बने!!

#sm मन लागा यार...

--००--

मेरी जिंदगी की शाम हो तो ऐसी हो 
कि 

अभी अभी हुआ भोर हो की जैसी हो। #sm
-
शाम हो अभी अभी हुआ भोर हो की जैसी हो।