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सितंबर 01, 2014

उफ़ गर्मी बहुत है रे

उफ़ ! गर्मी बहुत है रे..
उस पर ये बेशर्मी बहुत है रे !
रह-रह के हैसियत दिखलाए
पास खड़ी कितना इतराए 
महंगी-महंगी साड़ी पहने 
तन पर लादे हीरों के गहने 

उफ़ गर्मी बहुत है रे ....
उस पर ये बेशर्मी बहुत है रे !

निशदिन मंहगे पार्लर को जाए
ख़ुद पर लीपा-पोती करवाए
बालों पर कालिख पुतवाए
नाखूनों पर सान चढ़वाए
दाँत भी डाक्टर से चमकवाए
अपनी हर कुरूपता छुपाए
कृत्रिम सुन्दरता पर भी इतराए

उफ़ गर्मी बहुत है रे.....
उस पर ये बेशर्मी बहुत है रे !
पति की चाकरी पर इठलाए
उसको आला अफसर बतलाए
पति न देता हो चाहे कुछ भाव 
कहे जमीन पर रखने न दे पाँव 
कहती फूलों की सेज पर सोए
पति के दुलार में सुध-बुध खोए
उसके प्यार की क़समें खाए
प्रेम की झूठी तस्वीरें दिखलाए

उफ़ गर्मी बहुत है रे.....
उस पर ये बेशर्मी बहुत है रे !

बच्चो की बड़ाई करते नहीं अघाए 
उनकी कमायाबी की कथा सुनाए
फेल हुए को भी पास बताए
उनकी नौकरी पर भी इतराए 
बिगड़ैलों को संस्कारी जतलाए
अच्छे-खासे रिश्तों को ठुकराए

उफ़ गर्मी बहुत है रे .....
उस पर ये बेशर्मी बहुत है रे !

सास ससुर ठीक से खाना न पाए
ख़ुद चुप्पे-चुप्पे रबड़ी-मेवा उड़ाए
झूठी सेवा के यश-गान गाए
पीठ पीछे सास को गुच्चि आए
पति के सामने भोली बन जाए
त्रिया चरित्र के रंग-ढंग दिखलाए

उफ़ गर्मी बहुत है रे.....
उस पर ये बेशर्मी बहुत है रे !


सविता मिश्रा 'अक्षजा'

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