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दिसंबर 23, 2012

भय बिन होए ना प्रीति-





कितनी बार बुलाया हमने प्रभु तुम ना आए
कितनों ने हम पर सितम ढाएं पर तुम ना आए |

हम चिखते-चिल्लाते रहें पर प्रभु तुम ना आए
कैसे द्रोपदी की एक पुकार पर तुम दौड़े आए थे |

इस युग में क्या तुम भी डर गए जो ना आए
हर युग में स्त्री का अस्तित्व हनन क्यों करवाए |

युग दर युग नारी पर अत्याचार क्यों बढ़ता जाता है
पहले था चिरहरण अब वहशी दरिंदा बन जाता है |

उस युग में बस चिरहरण कर लाज दुश्सासन ने लुटा
इस कलयुग में तो प्रभु देखो मानव गिद्ध ही बन बैठा |

प्रभु देखो हमको वह नोंच-खसोट रहा
हम बहुत चीखे-चिल्लाएं पर तू बैठा ही रहा |

हमारी यह दशा देख भी तुम क्यों ना अकुलाए
क्यों नहीं दुष्टों पर अपना सुदर्शन चक्र चलाए |

लाज लुटती रही हमारी, मानव बहशी हो गया
देखों ना प्रभु हमारी इज्जत को तार-तार कर गया |

अब तो जब तक सांस रहेगी मेरी तुझको ही कोसेंगे
बेटी क्यों बनाया हमको यही बात बस तुझसे पूछेंगे |

बनाया तो बनाया पर ऐसे कमजोर सी क्यों बनाया
आठ-दस को मार गिरायें ऐसी दुर्गा क्यों नहीं बनाया |

जब तुझे मालुम था तू भी डरकर रक्षार्थ नहीं आएगा
हमें शक्ति देता जिससे हम अपनी रक्षा आप कर पाते |

वह नारी बहुत किस्मत वाली है जिन पर दरिंदो की नजर नहीं पड़ती
कुछ ऐसी किस्मत सभी को देता तो बता प्रभु भला तेरा क्या जाता |

तू आ नहीं सकता था इस कलयुग में, डर गया था मालूम है हमें
बस तू हमें ही शक्ति दें दे यही प्रार्थना करतें हैं तुझसे तन-मन से |

हमारी शक्ति देख फिर तू हम क्या-क्या नहीं करते
गन्दी नजर से देखने वालों की आँख निकाल लेते |

गलत हरकत पर हाथ काटकर उसका मुहं काला करते
कोई नजर उठा ना देखता हमको फिर हम यूँ शान से चलते |

अदब से झुक जाती नजरें फिर तो नारी के सम्मान में
भय बिन प्रीति नहीं होती है प्रभु आजकल इस जहां में |...सविता मिश्रा

दिसंबर 16, 2012

~ अपने और गैर ~


तुम थे कभी अपने अब गैर क्यों हो गये,
वे थे कभी गैर अब अपने क्यों हो गये |
यह बात है मुझे कोसती,
मैं हूँ कि जबाब नहीं दे पाती |
जब मेरे पास दौलत थी सभी थे अपने,
आज क्यों हो गये सब के सब बेगाने |
आज वही लोग जिन्हें समझती थी मैं गैर,
सहारा दे रहे है मुझे दे रहे है आदर |
मुझे दुःख है कि मैं इंसान होकर भी,
इंसान को ना समझ सकी |

गैरों को अपना समझ कर अपना न सकी,
अपनों को गैर समझ कर भूला न सकी |
गैर है कि मेरे इतने हमदर्द हो गये ,
हम है कि इतने बेदर्द हो गये |
गैरों की जमात में खड़े अपनों को अपना ना सकी,
अपनों की खाल में छुपे हुए गैरों को ठुकरा न सकी |


सविता मिश्रा 

<<<वह जवान हो गया>>>

डर के मारे बंधती थी उसकी घिग्घी 
 हमारे सामने जुबान नहीं थी खुलती 
 सामने तो खड़े होने का साहस भी ना था 
 नजरें मिलाना तो बहुत दूर की बात थी 
 पर लगता है अब बहुत कुछ बदल गया 
 या हम बूढ़े हो गये या फिर वह जवान हो गया |
 ++ सविता मिश्रा ++

दिसंबर 12, 2012

+फायकू +


१-उधार ले ले जीतें
अब और क्या
तुम्हारें लिए

२-बनिया खूब चिल्ला पड़ा
चुकता किया उधार
तुम्हारें लिए

३-तुम हमारी धड़कन बनो
हम दिल बसे
तुम्हारें लिए

४-मरने के बाद भी
पीछा ना छोडू
तुम्हारें लिए

५-घर को खुबसूरत किया
चाहत पूरी की
तुम्हारें लिए

६-दर्दे इश्क क्या है
पुछु आशिक से
तुम्हारें लिए

७-फूल नारियल चढ़ा आई
मिन्नतें खूब की
तुम्हारें लिए

८-सभ्य थे हम कभी
असभ्य बन गये
तुम्हारें लिए

९-लक्ष्मण रेखा की पार
रक्षार्थ ही तुम्हारें
तुम्हारें लिए

१०-तन-मन- धन चाहिए
तुम्हारें ही साथ
तुम्हारें लिए

११-करती दुनिया तुम्हारी बुराई
भृकुटी तानी हमने
तुम्हारें लिए

१२-क्रोध की अति नहीं
शांत रहती बस
तुम्हारें लिए

१३-भूख लगी फिर भी
इंतजार तेरा ही
तुम्हारें लिए

१४-चोर चोर मौसेरे भाई
पकड़ें ही गये
तुम्हारें लिए

१५-तुम जो चाहों सब
बने हम बस
तुम्हारें लिए

++सविता मिश्रा ++

~ ~फायकू ~~


१-पोथी पढ़ी जग मुआ
हम पढ़े बस
तुम्हारें लिए

२-क्रिकेट के पीछे पागल
सब कुछ करे
तुम्हारें लिए

३-भीख मांग गुजारा करतें
ठौर करें हम
तुम्हारें लिए

४-यूँ दर-दर भटक
जियें सदा हम
तुम्हारें लिए

५-अपने प्रिय से अलग
रहतें है हम
तुम्हारें लिए

६-हर कर्म करें हम
जिए मरे भी
तुम्हारें लिए

७-डर-डर जियें हम
सब कुछ सहे
तुम्हारें लिए

८-उजाला तुम ले लो
अँधेरा हम बने
तुम्हारें लिए


९-तुम्हें हर जगह खोजता
चहूओर भटकता रहा
तुम्हारें लिए

१०-समस्या हर कही है
सुलझा लेंगे कुछ
तुम्हारें लिए

११-खुसनसीब थे हम भी
साथ जो हुए
तुम्हारें लिए

१२-जब जब रोयें हम
याद आई तेरी
तुम्हारें लिए


१३-भूख लगी फिर भी
खाएं नहीं हम
तुम्हारें लिए

१४-कुछ ख़ास कर जाऊ
पहचान हो हमारी
तुम्हारें लिए

१५-सोचती रही दिन रात
कुछ आयें ख्याल
तुम्हारें लिए

१६-तुम मेरे गिरधर हम
राधा बन जाएँ
तुम्हारें लिए

१७-कुछ ऐसा ही हो जाएँ
सच ही जीतें
तुम्हारें लिए

१८-फूल बन महके हम
खुसबू बिखेरे चहुतरफ
तुम्हारें लिए

१९-तुम सा ना बने
तुम में समायें
तुम्हारें लिए

२०-हायकू हुआ पुराना अब
फायकू मनभावन लगा
तुम्हारें लिए

सविता मिश्रा

~फायकू~


1-कंप्यूटर किबोर्ड बनते रहो
स्कीम आई कई
तुम्हारें लिए ..सविता

2-तुम भले भूले हमको
हम जीतें रहे
तुम्हारें लिए..सविता

3-तुमको ख़्वाबो में देखते
बातें भी करतें

तुम्हारें लिए..सविता

4-मत समझना पागल है
याद में तेरी
तुम्हारें लिए..सविता

5-यदि मुस्करा रहें है
हर मुस्कराहट नहीं
तुम्हारें लिए..सविता

6-नजर नजर का फेर
हर नजर नहीं
तुम्हारें लिए..सविता


7-समुन्दर में डूबना था
चुल्लूभर में डूबे
तुम्हारें लिए..सविता

8-सब शराब पीकें बहकें
बहकें बिना पियें
तुम्हारें लिए..savita

9-तमाशाबिन हो गयी दुनिया
मुस्कराती रही बस
तुम्हारें लिए..सविता


१०-फर्ज था जो निभाया
आगे भी निभाएंगे
तुम्हारें लिए..सविता

सविता मिश्रा
फायकू
++++++++१-इरादा अपना बता तो
जिन्दगी छोड़ दे
तुम्हारें लिए..सविता

२-बेदर्दो की दुनिया में
दर्द लिए फिरतें
तुम्हारें लिए..सविता


३-तुम मेरे इंद्र हो
हम सूरज बने
तुम्हारें लिए

४-दूध फाटे दही बने
लस्सी की हमने
तुम्हारें लिए

५-वह बोले हमेशा कड़वा
शहद घोल बताएं
तुम्हारें लिए


६-सब के सब गिरगिट
रंग बदलते जाये
तुम्हारें लिए

७-राम नाम खूबय जपा
नहीं समझ आये
तुम्हारें लिए

८-बस एक दीपक से
अँधियारा मिटाने चले
तुम्हारें लिए


९-चोट तू खाया दर्द
हमको ही हुआ
तुम्हारें लिए

१०-गम के समुन्दर से
मोती चुने हम
तुम्हारें लिए

११-खेत खलिहान फैली हरयाली
यादों में तेरी
तुम्हारें लिए


१२-ठानते कैसे ना हम
सम्मान जुड़ा था
तुम्हारें लिए

१३-मुश्किल भले ही हो
रखना सम्मान था
तुम्हारें लिए

१४-जीतें थे कभी हम
मर भी जाये
तुम्हारें लिए


१५-जंगलराज मचा हाहाकार चौतरफा
हम करेंगे कुछ
तुम्हारें लिए

१६-आँखों में ख्वाब सजाएँ है
कोई अपना आयें
तुम्हारें लिए

१७-राहों पर फूल बिछा दे
घरौंदा प्यारा बसा
तुम्हारें लिए


१८- सूरज भले ही डूबा
हम नहीं डूबे
तुम्हारें लिए

१९-भागते शोहरत के पीछे
हम अडिग खड़े
तुम्हारे लिए

२० -बिछड़कर नहीं जिन्दा रहती
जिन्दा है हम
तुम्हारें लिए


सविता मिश्रा

~फायकू ~

फायकू की गुरु बनी
गुस्ताखी ना हो
तुम्हारें लिए ........

सूरज तुम कहते हमको
डूबे निकले फिर
तुम्हारें लिए

क्या करे दिल का
धड़कता है बस
तुम्हारें लिए ...सविता मिश्रा

चाहा था सीखना आपसे
सोचा सीख लेंगे
तुम्हारे लिए

भला होता किसी का
कर देंगें हम
तुम्हारें लिए

 पी लेंगे जख्मो दर्द
सह लेगें सितम
तुम्हारें लिए

जिंदगी की जंग हम
लड़ेगे मिलकर संग
तुम्हारें लिए

जूनून हो गया सवार
लिखू कुछ ख़ास
तुम्हारें लिए

जुड़ा मान सम्मान आपका
ठानें इसीलिए लिखेगें
तुम्हारें लिए

तुम अगर चले गए
नहीं सोचना आउंगी
तुम्हारें लिए

 छेड़ेगें मनचले तुम्हे सरेआम
खूबसूरती ढाकों जरा
तुम्हारें किये

बेपर्दा ना हो चलो
लफंगे हर कही
तुम्हारें लिए

चाहत थी देखो तुम
सोलह श्रंगार किया
तुम्हारें लिए

कही मुख ना मोड़ना
दुनिया छोड़ आई
तुम्हारें लिए

मौत का रास्ता रोका
ढाल बनी बस
तुम्हारें लिए

महफ़िल सारी तुम सजाओं
खुशियाँ हम बटोरें
तुम्हारें लिए

 रिश्तें नातें सब भूलू
याद बस तुम्हारीं
तुम्हारें लिए

मौत को दिया मात
जिन्दगी की आस
तुम्हारें लिए

 बहुत लड़ी मौत से
नहीं कोई पछतावा
तुम्हारें लिए

जिंदगी की छाव में
तुम्हारी बाहों में
तुम्हारें लिए

प्यारी आवाज तुम दो
हम ना आये
तुम्हारें लिए

मन से पुकारों तो
खड़े मिलेगें हम
तुम्हारें लिए

 मौत से लड़ते रहे
जिंदगी की चाह
तुम्हारें लिए

काम करो हमारे लिए
अपयश मिलता है
तुम्हारें लिए

नेता डाक्टर का नाम
पुलिस ही बदनाम
तुम्हारें लिए


सविता मिश्रा

दिसंबर 01, 2012

बेवकूफ पति अपनी पत्नी को घर की मुर्गी साग बराबर समझतें है और दुखी रहतें और उसे भी दुःख देते है|
तथा समझदार पति अपनी पत्नी को हूर की परी समझतें है खुद भी खुश रहतें है और उसे भी खुशियाँ ढेर सारी देतें है |...सविता मिश्रा

~घडियाली आंसू~ +वादा +


चिताओं पर आंसू बहाने की फुर्सत किसे है
बेवफ़ा इश्क क्या कम है इन आंसुओ के लिए,
लुटाना है तो लुटाओं किसी अपने के जनाजें पर
वहाँ पर घडियाली आंसू क्यों हो बहाने के लिए|..सविता मिश्रा

                                                

चलो आज कुछ ना कुछ सभी बोल दो
सालों से मन में पड़ी गिरह खोल दो
वादा है हमारा बुरा ना मानेगें हम
शिकायत आपकी दूर करने की कोशिश करेगें हम|
..सविता मिश्रा
...
तारीफ़ करने से जो डरतें है वही सबसे ज्यादा प्यार करतें है
वाकिफ है हम इस गुप्तगू से क्योकि हम भी तो यही करतें है |...सविता