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अप्रैल 16, 2018

रहना सीखो-

कल किसने देखा है
क्या होगा !
आज में जीना सीखो 
दूजे के प्रति रुखे
अपने व्यवहार को
तुम बदलना सीखो
सोते सोते दिन बिता रहे हो
तो जरा जागना सीखो
पाप कर्म को पुन्य में
तुम तनिक बदलना सीखो
मान लो सविता की बात
हर एक क्षण तुम जीना सीखो
कल रहे, न रहें हम
आज ही सब से प्रेम से
मिल-जुलकर रहना सीखो |सविता मिश्रा 'अक्षजा'

2 टिप्‍पणियां:

Dhruv Singh ने कहा…

निमंत्रण

विशेष : 'सोमवार' २१ मई २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक के लेखक परिचय श्रृंखला में आपका परिचय आदरणीय गोपेश मोहन जैसवाल जी से करवाने जा रहा है। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/



टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

सविता मिश्रा 'अक्षजा' ने कहा…

शुक्रिया, घूम आये हम आपके ब्लॉग पर।