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फ़रवरी 20, 2017

घमंड ना करना --

करना है तो कर्म करना
घमंड न करना
आया है मुट्ठी बाँधकर
खुले हाथ ही 
है जाना |


फर्श से अर्श पर चढ़ा है
तू मेहनत से जैसे
विनम्रता से रख उसको
कायम तू कुछ ऐसे
क्यूँ घमंड में चूर हो
करता है अपमान किसी का
pap ki handi ko kyo bharna
करना है तो कर्म करना
घमंड न करना |

वरना देर नहीं लगती है
अर्श से फर्श पर आने में
राजा कब रंक बन जाएँ
बना रह जाएँ कब वह राजा
उस विधाता के पास लिखा है
इसका लेखा जोखा ताज़ा ताज़ा |

तेरे कर्म ही तो करते हैं
यह सब कुछ निर्धारित
चल अब सबसे ही
प्यार से गले मिल त्वरित
pyar se bahon ki mala dalna
करना है तो कर्म करना
घमंड न करना |

मान दे दूजे को
इस जग को तू जीत लेगा
अपमान किया किसी का तो
बद्दुआ ही तुझko मिलेगा
kabhi kisi ka dil  nahi  dukhana
करना है तो कर्म करना
घमंड न करना |

सम्मान देकर तू और भी
ज्यादा निखर जायेगा
किस्मत चमकेगीं और
तेरा परलोक भी सुधर जायेगा
udati hui paang ki dor pakde  rahna
करना है तो कर्म करना
घमंड न करना ||...सविता मिश्रा

5 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 21 फरवरी 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Savita Mishra ने कहा…

बहुत बहुत आभार आपका ..सादर अभिवादन

रश्मि शर्मा ने कहा…

बहुत बढ़ि‍या

बेनामी ने कहा…

सुन्दर शब्द रचना

संजय भास्‍कर ने कहा…

सुंदर रचना.... आपकी लेखनी कि यही ख़ास बात है कि आप कि रचना बाँध लेती है