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फ़रवरी 12, 2017

हायकु

अभाव नहीं
सब नियंत्रण में
घटना घटी |....सविता


प्रेम का भाव
समझ के पराये
हुए अपने |..सविता मिश्रा

नियत साफ़
आशीष फलता है
बड़ों का तभी |...सविता मिश्रा

यादें बिखरी
कभी हंसी या गम
जब भी आई |  .
..सविता मिश्रा


रोना रुलाना
कंधे पड़ते कम
रिश्तों का मोह |
...सविता मिश्रा


रुलाता रिश्ता
कंधे छूटते राह
प्रगति ऐसी |
...सविता मिश्रा

5 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 13 फरवरी 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

आज की ब्लॉग बुलेटिन जन्मदिन भी और एक सीख भी... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुन्दर।

Sudha Devrani ने कहा…

वाह!!!८

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत सुन्दर।