समर्थक

दिसंबर 16, 2014

हायकु

ज्ञान से ज्ञान
अज्ञानी से ज्ञानी
मुर्ख अंजान|

जिज्ञासु प्राणी
उड़ता है गगन
ज्ञान पिपाषु|
ज्ञान पिपाषा
सामने गुरु को पा
हो गयी शांत

ज्ञानी-अज्ञानी
शब्द निकसे मुख
हो जाता ज्ञान |

मन उन्मुक्त
छूने को उत्सुक हैं
ज्ञान गगन|

ज्ञान परिंदा
पंख फड़फडाता
सध उड़ता|


ले जाता सदा
अधकचरा ज्ञान
दुर्गति ओर| सविता

कोई टिप्पणी नहीं: