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दिसंबर 12, 2014

कुछ क्षणिकायें.


...६/८४
१-चले थे समुद्र की गहराई को नापने,
पर स्वयं को ही समुद्र से गहरा पाया |

२-पानी में डूबते वही जो तैरना जाने,
तैरते वही जो स्वयं को निडर माने

३-दिखाने चले थे उन्हें डगर हम,
पर स्वयं को ही भटका पाया |
रास्ता भटक गये जब हम ,
तो उन्होंने ही हमें रास्ता दिखाया |

1 टिप्पणी:

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर..