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फ़रवरी 28, 2013

गम के समुन्द्र में न कभी डूबना
खुशियों नदियों में भी तैरना
आदत है दुनिया की ग़मों को देना
खुशियों के पोखर को भी सहेजना
गमो पर तब खुशियाँ होगी भारी
दुनिया के कवायदों पर फिरेगा तब पानी
|..सविता मिश्रा

1 टिप्पणी:

राकेश कौशिक ने कहा…

जीवन रुकने का नहीं चलने का है नाम
इसलिए हँसते रहो रोने का नहीं काम