समर्थक

मार्च 09, 2013

+चूहे की करामत+


एक चूहे की करामत,
प्रोफाइल -पिक पकड़,

चिपका दिया लें जा यहाँ-वहाँ|
देखा जब हमने उ़स मंच पर सुन्दर सा चित्र ,
लिखा बहुत अच्छा है, काश यह अपना होता |
पर फिर सोचा दो -चार दिन में एकाक चित्र या,
पोस्ट खातिर क्यों हम चिपके यहाँ |
जिस चूहे ने चपकाया था वहाँ
उसी को पकड़ हम निकल गये |

एक भईया ने तो हद कर दी,
जैसे आये वैसे ही ,

दूसरे मंच से जा चपकाया हमको|
हम भी निकले बड़े सयाने,
बिन देखे ताकें,

तुरंत वहाँ से भी खिसक लिए |

यहाँ भी एक छोटे से चूहे ने ही ,करामात दिखाई |
हमें जोड़ने से पहले थोड़ा तो पूछ लिया करो भाई |

जब हम मंचों से चपके ,
कुछ पर तो वहाँ के ,

मेंठो ने स्वागत किया,
कुछ ने तो भाव भी ना दिया |


कुछ ने शिष्टता दिखाई,

यहाँ-वहाँ चपकाने से पहले ,
इजाजत पानी चाही |

हम यहाँ वहाँ चपकने के कारन,
हो गये थे
परेशान ,
अत:कैसे जुड़ते वहाँ साईं |

पता नहीं क्यों नहीं सोचते ,
मंचों के ठेकेदार |

हम ही इस थाली से,
उ़स थाली ढनग रहे ,

  और मेंठ है कि अपनी ,
संख्या बढ़ा ही चहक रहे |

संख्या बढ़ाने के चक्कर में,
ना जाने किसको किसको जोड़ रहे |

अपने सदस्यों की संख्या में ही फूले है,
नहीं जानते यह सब भ्रम के झूले है |

पहले हमें पता ही नहीं था,
कैसे खिसके मंचों से|

जब तक पता चला हमें,
एकाक अच्छे पोस्ट पढ़ चुके थे |

उन्ही एक-दो के कारन,
आज भी जुड़े हुए है |

यह सब तमाशा देख,
सहसा हमें हमारे बुजुर्ग याद आ गये |

सही कहते थे वे कि चूहा भी,
कभी कभी शेर पर भारी पड़ता है |

||सविता मिश्रा ||

कोई टिप्पणी नहीं: