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मार्च 29, 2013

प्यार के बजाय अंगार दिल में है भरा ~

देश की तरफ आँख उठा कर देखे दुश्मन जो कोई ,
जा पड़े आँख में हम शोला बन उसकी शामत आई।

अब तो हो चुके शहीद स्वदेश पर क्या करें हम में से कोई
जो जिन्दा है उनकी तो जैसे आज देशभक्ति ही है खोई |

भरा है प्यार का दहकता अंगार दिल में हमारे ,
स्वदेश के प्रति सम्मान भरा अधिकार दिल में हमारे |

देश के लिए मर मिटने का जूनून था कभी दिल में हमारे ,
आज स्वप्रेम के मोह में देशप्रेम हो गया है एक किनारे |

आज देश की देख यह हालत गर्व के बजाय अफ़सोस है ,
जिसके लिए मर मिटे हम भूलकर हमें ही वह मदहोश है |

जिस देश के लिए हँसते हँसते खाई हमने अपने सीने पर गोलियां,
उसी मेरे प्यारे देश को बेच रही हैं यहाँ अराजक तत्वों की टोलियां|

खोखला कर स्वदेश को अपना ही घर माल से भर रहें हैं ये नेता
क्यों देश-भक्ति के बजाय भर गयी हैं इनमें इतनी अधिक लोलुपता |

चूमकर झूल गए थे फांसी के फंदे पर कुछ भी न निकली बोलियाँ,
उदास बहुत ये मन बढ़ता हुआ देख देश में गरीबों की खोलियां|

प्यार के बजाय दिल में धधक रही है अब ज्वाला समझो
कहीं ऐसा ना हो कि कब्र से उठकर जला दे हम तुमको | 
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सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई ....भले ही हम पूर्ण स्वतन्त्र नहीं है फिर भी बहुत बहुत शुभकामनायें ................

...पुराना रूप ...

प्यार के बजाय अंगार दिल में है भरा हमारे ,
अपने देश के प्रति सम्मान दिल में है भरा हमारे |
आँख उठा कर जो देखे कोई दुश्मन इसकी तरफ ,
आँख में जा पड़े हम उनके शोला बन चौतरफा |
देश के लिए मर मिटने का जूनून था दिल में हमारे ,
देश प्रेम में आ फांसी के फंदे को भी चूम लिया हमने |
पर आज देश की देख यह हालत गर्व के बजाय अफ़सोस है ,
जिसके लिए मर मिटे हम वह हमें ही भूल मोहपाश में है |
जिस देश के लिए हमने हंसते-हंसते खायी थी ,
सीने पर अपने गोलियाँ झूमे थे फांसी के फंदे पर भी |
उसी देश को बेच खा रहे है यहाँ के नेता ,
क्यों देश-भक्ति के बजाय भर गयी है इनमें इतनी अधिक लोलुपता |
प्यार के बजाय अंगार दिल में है भरा हमारे ,
कही ऐसा ना हो कि कब्र से भी उठ जला दे हम तुमको |
||सविता मिश्रा ||


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