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अक्तूबर 13, 2013

क्यों नारी ही दुःख पाती है-

राम बने कोई, चाहे बने रावण
हैं दोनों मेरी दृष्टि में महान
लेकिन एक नादाँ सा है मेरा सवाल
क्यों हर हाल में
नारी ही दुःख पाती है ?
रावण की मृत्यु हो
इस कारण
सीता ही क्यों वन को जाती है ?

लक्ष्मण की पत्नी क्या
नारी नहीं कहलाती है !
चौदह साल जो बिना विरोध किये
पति-विछोह को सह जाती है
बिन पानी मछली की तरह
हर दुःख को वह पी जाती है
सास की सेवा में रहकर वह
अपना जीवन व्यतीत कर जाती है !

मेघनाथ को मिला वरदान जहाँ
उर्मिला के लिए श्राप बन जाता है
दशरथ का अनुचित कर्म भी वहाँ
कैकेयी को ही अपयश दिलाता है
यूँ हर हाल में क्यों..नारी ही दुःख पाती है |
रावण की मृत्यु हो !
इस कारण सीता ही क्यों वन को जाती है ?

मंदोदरी का था क्या अपराध ?
जिसके पति-परमेश्वर के
था अमृत नाभि के पास
मार सकता था उसे कोई खासमखास
करता था वह भीषण अट्टहास
देवता भी जिसकी मुट्टी में थे
जिसका पति हो इतना बलसाली
उसकी भी मिट गयी सिंदूर की लाली
भेदिया विभीषण ने कहानी सारी कह डाली
सारी की सारी लंका उसने जला डाली
विभीषण ने तो गद्दारी करके गद्दी पा पाली
लेकिन यहाँ भी दुखी भई एक निरपराध नारी |

सार यह है कि हर हाल में
नारी ही क्यों मारी जाती है
नियति मंथरा से ही क्यों चाल चलवाती है
कैकेयी ही क्यों कोपभवन को जाती है
एक औरत ही क्यों होनी के वास्ते
अपने हाथों अपनी मांग उजाड़ती है
सुर्पनखा की ही क्यों नाक काटी जाती है
कैकेयी ही क्यों माता से कुमाता बन जाती है
द्रोपदी ही क्यों अपना चीर हरण करवाती है
दुर्योधन के अहंकार को वह क्यों ठेस पहुंचाती है
नियति क्यों हर बार नारी को ही मुहरा बनाती है
निष्कपट-निष्कलंक नारी से ही चाल चलवाती है ?

हर हाल, हर युग में नारी ही क्यों मारी जाती है
कुपरिस्थितियों के भेंट नारी ही क्यों चढ़ जाती है ?
सवाल हैं बहुत तंज से भरे, जवाब हमें अब चाहिए
नारी विरोधी परिस्थितियों को अब सुधारना चाहिए
नारी को ही युगों-युगों से क्यों-कर दुःख दिया जाए ?
सम्मान देकर क्यों न अब इसका प्रायश्चित किया जाए !
सवाल पेचीदा अब यह निरुत्तर नहीं छोड़िए
नारी के सम्मान में अब एकजुट हो लीजिए |
क्यों हर हाल में नारी ही दुःख पाती है ?
रावण की मृत्यु हो इस कारण
सीता ही क्यों वन को जाती है ?
--००---
सविता  मिश्रा  'अक्षजा'

1 टिप्पणी:

Savita Mishra ने कहा…

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