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मार्च 15, 2015

बस यूँ ही

१....
मेरे हुनर का होगा देखना ऐसा कमाल कि
दुश्मन को भी होगा मेरे मरने का मलाल |....सविता

२...
शांति मिली कहाँ, यहाँ कभी शांति से
करनी पड़ी अशांति, अक्सर शांति से | ,...सविता

३ ...
ऐसे-ऐसे ना जाने कैसे कैसे ....कैसे होकर अपना रूप दिखाते हैं
हम सीधे साधे सच्चे होकर भी बस मुहं ताकते रह जाते हैं| सविता

४....
प्यार के दो बोल बोलता था कोई जेहन में शहद सा घोलता था कोई
ना जानें क्यों अब क्या हुआ ना वह बोलता ना हम ही बोलतें| ...सविता मिश्रा

५...
कद और पद के घमंड में कितने लोग देखो हुए हैं चूर
और कहीं कद पद की मर्यादा भंग कर हुए हैं मगरूर
| ...सविता मिश्रा

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