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अप्रैल 02, 2015

हमारा उत्तर प्रदेश~`

बस मन में एक ख्याल आया लिख गये ...:)
बदनाम भले है
उत्तर प्रदेश
पर इसकी
माटी को छूते ही
हर कोई खरा
हाँ खरा सोना
सा हो जाता है

कितने महात्मन
साधू-सन्यासी
वेद पुराण ज्ञाता
लेखक-कवि
कद्दावर नेता
और कई बुद्धिजीवी
इसी धरती की देन हैं

जो नहीं भी हैं
इस धरती पर
कदम रखते ही
वो लोग भी
कनक से हो जाते हैं

पारस !!
हाँ पारस !
कह सकते हैं आप
इस धरती को ..

मेरी, तुम्हारी
और सभी की भी
एक बार ही सही
यहाँ की हवा में
ली हैं साँसे
जिसने
सांसो के जरिये
उनके
शरीर में
घुल गयी है

यूपी की माटी की तासीर
बुद्धिमता की दौड़ में
बढ़ गया वह आगे

पर अफ़सोस
परजीवी भी
बहुतायत में
इसी माटी में
पाए जाने लगे हैं
और बद से ज्यादा
बदनाम होने लगा है
हमारा उत्तर प्रदेश |

सविता मिश्रा 'अक्षजा'
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2 टिप्‍पणियां:

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर

Ashwini Kumar ने कहा…

Good blog. Padhkar khushi hoti hai. Yadyapi mera janm Ghazipur mein hua lekin maine kabhi prantiya identity ko nahi sweekar kiya hai.