समर्थक

जून 06, 2015

अपने से इतर ~

बहुत कोशिश की हमने
दिल से दिल मिलाने की
पर एक बात मन में
तीर सी चुभ गयी !
नासूर ना सही पर
तनिक घाव कर 
ही गयी
कहते थे
बहुत किया है
 उन्होंने सभी का
पर इस बार
पट बंद कर लिया घर का |

क्या जो मुहं से कहते 
हैं अक्सर
वह करतें भी कभी दूजे के लिए
डिंग हांकने को तो
बहुत से लोग हांकते हैं
पर किया क्या ?
अपने गिरेबान में नहीं झाँकते हैं |

झांको जरा गिरेबान अपना
कुछ न मिलेगा!
जो दिखाते हो रौब
apni karmaryta ka
वह भी नदारत होगा |

अपने से इतर हो देखो
तो दुसरे के गुण  पाओंगे
खुद धरती पर पड़े धूल चाटते नजर फिर आओंगे |.....सविता मिश्रा

कोई टिप्पणी नहीं: