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जून 23, 2015

++तुम वो जो मैं चाहूँ ++

तुम लिख दो वो ख़त जो मैं बांच ही ना पाऊ !!! फिर भी पढूँ  हर रोज ,,,इतराऊ बलखाऊ खुद पर ...कि लिखा तुमने कुछ तो उसमे ख़ास!! सिर्फ मेरे लिये!!!!!!

तुम बोल दो वो वचन जो गुदगुदा जाए !!! मेरे  हृदय तक को....मनन कर उन शब्दों को मुस्कराती रहूँ मैं , हर पल, हर घड़ी !!क्यों बोलोगें न, शहद से मीठे बोल !!!!!

ख्यालों में बादल सा घुमड़ों तुम , जहाँ चाहूँ बरसो ,जहाँ चाहू ठहर जाओ , पल दो पल ...देख तुझे इतराऊ मैं , अपनी ही किस्मत पर!!!!!

दिल की धड़कन बन धड़को ...मैं महसूस करुँ जब एकांत में होऊ, गर्व से इतराऊ कि कोई तो इतना अपना हैं , हर पल रहता साथ मेरे, बन धड़कन मेरी!!!!!

खड़ी होऊ जब जब आईने के समक्ष, मुझमेँ तुम ही दिखो !!! संवारु मैं खुद को तो संवर तूम जाओ ,तुममें मैं मुझमें तुम बसो और एकाकार हो मैं इठलाऊ !!!!!

बन्द करूं जब जब आँखे ,तुम ही तुम दिखो , बसों ऐसे मेरे मन मंदिर में कि मैं भगवान में भी , तुमको ही निहार पाऊँ.... बताओ न !!! होवोगें ऐसे ही न, जैसे मैं देखना चाहती  हूँ तुम्हें  !!!!!!

.यूँ ही बेख्याली में

4 टिप्‍पणियां:

Rakesh Kaushik ने कहा…

बहुत खूब

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, जीना सब को नहीं आता - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Sumit Gupta ने कहा…

बेख्याली में अच्छा लिखा है। :)

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत खूब