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नवंबर 20, 2012

~ निःसंतान भारत अपना ~

 
अरबों की जनसंख्या है फिर भी
भारत है निःसंतान हमारा
क्या संतानें ऐसी होती हैं
अपने ही माता को नोंच-खसोट लेती हैं |

हैं दुर्भाग्य बहुत बड़ा
अरबों पुत्रों वाला असहाय खड़ा
सब भारत के बच्चें खुद को कहते हैं
पर मौका मिलते ही लूट-खसोट लेते हैं

वोट पाकर पदवीं पर जो बैठ जाते हैं
अपनी माता को ही वो
विदेशों में गिरबी रख आते हैं
खुद करोड़पति बन जातें हैं कुर्सी पाते ही
अपने भारत को कंगाल बता
विदेशों से भीख तक मांग ले आते हैं |

हैं कितना दुर्दिन बड़ा भारत का अभी
सोने की चिड़ियाँ कहलाता था ये कभी
पर अपनें ही पुत्रों ने क्या हाल कर डाला
कटोरा हाथ में दें भीख तक मँगवा डाला |

ऐसे अरबों-खरबों औलादों से क्या फायदा
जो अपनी ही माता का सर नीचा करे ज्यादा से ज्यादा |
अरबों की जनसंख्या है फिर भी
उम्मीद नहीं हैं भारतमाता को किसी से भी ज्यादा | सविता मिश्रा

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