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अक्तूबर 03, 2016

~~ मेरी कलम~~

मैं तो कुछ भी ना थी,
तूने ही तो हमें

कुछ बना दिया।
जो छुपे थे भाव
दिल की गहराइयों में,
तूने ही उन्हें
सार्थक शब्दों से बूना।

भावों को मेरे शब्द दिया,
मूक भावना को मेरे
उनका अर्थ दिया।
स्वयं भी थी मूक
पर कागज पर आते ही,
विद्रोही,पीड़ित बनी
एवं हमें भी तूने
कुछ यूँ ही बना दिया।
तूने मुझे ताकत दी हिम्मत दी,
करूँ कैसे धन्यवाद तेरा
ओ मेरी लेखनी!

कलम थी एक आम
तू भी मेरी तरह,
पर तूने ही हमें
आम से खास बना दिया
तू भी अब मेरे लिए
बहुत ही है खास |
क्योंकि तेरे ही तो
सहारे मैं अल्पज्ञ से,
सर्वज्ञ्य की ओर
बढ़ने की कोशिश में हूँ।

तू भी मेरा साथ देना
ओ मेरी कलम !
मेरी मूक भावना को
आवाज देना ओ मेरी कलम !
मैं तो कुछ भी ना थी,
तूने ही हमें सब कुछ बना दिया।

८/५/२०१२

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