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अगस्त 30, 2013

बस यूँ ही

१ ...हम ही मगरूर थे या ये दुनिया वाले ही गुरुर में थे
ना हमरा कोई हुआ ना ही हम किसी के हो सकें| ..सविता मिश्रा

२ ...जो दुःख दे ऐसे मोती बिखर ही जाएँ तो अच्छा ..
दुःख में हम तप कर निखर जाये तो अच्छा|...सविता मिश्रा

३ ...डूबता हुआ सूरज को देख मत समझ डूबा हमेशा के लिए
कल फिर निकलेगा फैलेगी रोशनाई चारों तरफ सविता| .....सविता मिश्रा

४.....भुजंग विष हटत नहीं कितना भी करि साधू- सत्संग
उत्तम कोई नहीं रही जात कुसंग में सब बहि जात है| ..सविता मिश्रा

५ ...चाल ऐसी ना चलो की जिन्दगी पर पड़ जाय भारी
नजदीकिया बनाने के लिए रखना होता है बात जारी| ...सविता मिश्रा

६ ...भूल जाये यह फितरत है जमाने की सविता
आज के दौर में कौन किसको याद रखता है| .....सविता मिश्रा

७ ...हद में रहतें हुए हमने ना जाने कब हद खो दी अपनी
तुम कुछ हमारे दिल में यूँ ही पैठ बनातें गये बन अपने| .....सविता मिश्रा

८...किसने कहा कि मुसाफिरों से दिल लगाया हमने
दिल है आ ही जाता कम्बक्त मानता ही कब है|... सविता मिश्रा

९....खंजर रखतें है हम भी बड़े नजाकत से
दिल जब आये किसी पर तो उतार ही देते है| ... सविता मिश्रा

१०...वाह वाह कर ना यु सर पर चढाओं
मालूम है हमें हम कोई शायर तो नहीं| ....सविता मिश्रा .....बस यूँ ही

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