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अगस्त 30, 2013

मौत से नहीं घबरातें थे हम अपने ही
आगोश में सुलातें थे उसे .....
पर जब से प्रिय ने प्यार से पुकारा है
हम मौत से ही डरने से लगें है| .............सविता मिश्रा



ताकीर हुई आने में हमारे
वह हमसे नाराज से रहने लगे
जा पास बैठे थे जब हम उनके
वह निगाहों से ही बस शिकवा करने लगें|...सविता मिश्रा



यूँ नाजो अदा से ना मुस्कराया करो
बेचारों पर ना कहर ढया करो
हो अप्सरा सी खुबसूरत आप
रोज हमारे लिए जमी पर उतर आया करो| ...सविता मिश्रा

आईने झूठ कभी बोला नहीं करतें
दिलको हम ही सही से टटोला नहीं करतें
चेहरे की देख बाह्य रौनक फंस जाते हैं

अन्दर कभी गिरेबान में देखा नहीं करतें| .....सविता मिश्रा


दर्द दे जब मरहम लगाओगें
अपने दिल को यूँ मनाओगे
उन्हें क्या पता है कि हाथों में तेरे
मरहम ही है या फिर नमक लगाने आये
| .....सविता मिश्रा

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